दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल गरमाता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन को पुलिस हिरासत में रहते हुए चुनाव प्रचार की अनुमति दी है। ताहिर हुसैन मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं और उन्हें प्रतिदिन 12 घंटे प्रचार के लिए जेल से बाहर रहने की इजाजत मिली है। यह अनुमति 29 जनवरी से 3 फरवरी तक के लिए दी गई है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वे अपने घर नहीं जा सकते और प्रचार के दौरान अपने खिलाफ लंबित मामलों पर चर्चा नहीं कर सकते। इसके अलावा, ताहिर हुसैन को अपनी सुरक्षा के लिए प्रतिदिन ₹2.47 लाख का भुगतान करना होगा।
प्रमुख नेताओं की रैलियां: दिल्ली का राजनीतिक माहौल गरम
इस चुनाव में बड़े राजनीतिक दिग्गज मैदान में उतर चुके हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में प्रचार करेंगे।
भाजपा ने 30 वर्षों बाद दिल्ली में सत्ता पर काबिज होने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए पार्टी ने गरीब महिलाओं, बुजुर्गों और छात्रों के लिए वित्तीय सहायता जैसी योजनाओं को प्रमुखता दी है। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी (आप) अपनी मुफ्त पानी, बिजली और शिक्षा की योजनाओं को लेकर जनता के बीच समर्थन जुटा रही है।
कांग्रेस का नया दांव: पूर्वांचलियों के लिए अलग मंत्रालय
कांग्रेस ने चुनावी घोषणा पत्र में पूर्वांचलियों के लिए अलग मंत्रालय बनाने का वादा किया है। उनका उद्देश्य दिल्ली में पूर्वांचल के नागरिकों के स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी मुद्दों को हल करना है। कांग्रेस इस योजना को दिल्ली में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने के तौर पर देख रही है।
चुनाव की तिथियां और संभावनाएं
दिल्ली विधानसभा चुनाव 5 फरवरी 2025 को आयोजित होगा। राज्य में कुल 70 विधानसभा सीटें हैं, जहां मुख्य मुकाबला आम आदमी पार्टी, भाजपा और कांग्रेस के बीच है।
योगी आदित्यनाथ की रणनीति
भाजपा के लिए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रमुख प्रचारक के तौर पर भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में 14 रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई है। माना जा रहा है कि योगी की छवि और प्रभाव भाजपा के चुनावी अभियान को नई दिशा दे सकते हैं।
ताहिर हुसैन पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक अहम मोड़ पर आया है। ताहिर हुसैन पर दिल्ली दंगों से संबंधित कई आरोप हैं, लेकिन कोर्ट ने उन्हें प्रचार करने की अनुमति देकर उनके राजनीतिक अधिकारों की रक्षा की है। हालांकि, इस फैसले पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।
दिल्ली की राजनीति का भविष्य
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे राज्य की राजनीति की दिशा को निर्धारित करेंगे। भाजपा, आप और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। इस चुनाव में जहां भाजपा विकास और सुरक्षा के मुद्दों पर जोर दे रही है, वहीं आप अपनी जनहितकारी योजनाओं के दम पर सत्ता बचाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस भी पूर्वांचलियों को लुभाने के प्रयास में जुटी है।
निष्कर्ष:
दिल्ली का चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म है। जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कौन-सी पार्टी उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरती है। यह चुनाव दिल्ली की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है।
