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गाजा संघर्ष विराम और बंधकों की रिहाई: एक नई सुबह की उम्मीद


गाजा और इजरायल के बीच 15 महीने से चल रहे भीषण संघर्ष में आज एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। 19 जनवरी 2025 को, सुबह 8:30 बजे (भारतीय समयानुसार 12:00 बजे) से संघर्ष विराम लागू होगा। इस कदम के तहत न केवल युद्धविराम होगा, बल्कि दोनों पक्षों द्वारा बंधकों और कैदियों की रिहाई भी की जाएगी। यह समझौता मिस्र, कतर और अमेरिका की मध्यस्थता से हुआ है।





तीन चरणों में लागू होगा समझौता

इस संघर्ष विराम को तीन चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में, हमास द्वारा 33 बंधकों को रिहा किया जाएगा। इनमें महिलाएं, बच्चे और वृद्ध शामिल होंगे। इसके बदले में, इजरायल 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा, जिसमें 735 कैदी पहले चरण में छोड़े जाएंगे। इन कैदियों में वे लोग भी हैं, जिन्हें इजरायल ने 15 महीने पहले युद्ध शुरू होने के बाद गिरफ्तार किया था।

रफ़ा से इजरायली सेना की वापसी

हमास समर्थित मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली सेना ने गाजा के रफ़ा क्षेत्र से फिलाडेल्फी कॉरिडोर की ओर वापसी शुरू कर दी है। यह क्षेत्र गाजा और मिस्र की सीमा पर स्थित है। इजरायली सेना के इस कदम को संघर्ष विराम की दिशा में पहला ठोस कदम माना जा रहा है।

बंधकों की सूची पर असहमति

बंधकों की रिहाई को लेकर अब भी कुछ असहमति की खबरें हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि जब तक हमास बंधकों की पूरी सूची नहीं देगा, तब तक इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। वहीं, हमास ने "तकनीकी कारणों" का हवाला देते हुए सूची भेजने में देरी की बात कही है।

पहले चरण में रिहाई का कार्यक्रम

पहले चरण के तहत आज दोपहर तीन महिला बंधकों को रेड क्रॉस के माध्यम से रिहा किया जाएगा। इसके बदले में 30 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया जाएगा। अगले सात दिनों में चार और बंधकों को छोड़ा जाएगा। इसके बाद हर सात दिन में तीन बंधकों की रिहाई का कार्यक्रम तय किया गया है।

युद्ध की पृष्ठभूमि

गाजा में यह युद्ध 15 महीने पहले शुरू हुआ था, जिसमें हजारों लोग मारे गए और लाखों लोग विस्थापित हुए। इस युद्ध ने मध्य पूर्व की शांति प्रक्रिया को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

क्षेत्रीय तनाव और नई चुनौती

संघर्ष विराम की घोषणा के तुरंत बाद, यमन के हूती विद्रोहियों ने यरूशलम की ओर एक मिसाइल दागी, जिसे इजरायल के रक्षा तंत्र ने नष्ट कर दिया। इस घटना ने संघर्ष विराम की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या संघर्ष विराम टिक पाएगा?

संघर्ष विराम और बंधकों की रिहाई के प्रयासों को शांति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, पिछले अनुभवों को देखते हुए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह कदम कितना स्थायी साबित होता है।

दुनिया की निगाहें गाजा पर

मध्य पूर्व में इस संघर्ष विराम के लागू होने से शांति स्थापना की उम्मीदें जगी हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र, इस प्रक्रिया को सकारात्मक रूप से देख रहा है।

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