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बिहार में बीपीएससी की परीक्षा में विफलता: क्या है वजह?

                                     बिहार में बीपीएससी की परीक्षा में विफलता: क्या है वजह?



बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की 70वीं संयुक्त (प्रारंभिक) परीक्षा 13 दिसंबर को पटना के बापू परीक्षा परिसर में हुई थी, लेकिन यह परीक्षा विवादों के बीच रद्द कर दी गई। परीक्षा के दौरान हुए बवाल के बाद कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें पटना के ज़िलाधिकारी चंद्रशेखर सिंह एक परीक्षार्थी को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे थे, और परीक्षार्थी एक-दूसरे के प्रश्नपत्र छीनते हुए दिखे।

बीपीएससी की सफाई और पुनः परीक्षा

16 दिसंबर को बीपीएससी के अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई ने इस घटना पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि बिहार में 912 परीक्षा केंद्रों पर यह परीक्षा आयोजित की गई थी, और बापू परीक्षा परिसर में हुए उपद्रव के कारण यहां की परीक्षा रद्द की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस केंद्र के परीक्षार्थियों की परीक्षा फिर से आयोजित की जाएगी और उपद्रव करने वाले छात्रों को चिन्हित करके उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पेपर लीक और धांधली की समस्याएं

यह पहली बार नहीं है जब बीपीएससी को पेपर लीक और धांधली के कारण आलोचना का सामना करना पड़ा हो। बीती सालों में बीपीएससी की कई परीक्षाएं पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के कारण रद्द की जा चुकी हैं। उदाहरण के तौर पर, 2022 में बीपीएससी की 67वीं संयुक्त (प्रारंभिक) परीक्षा पेपर लीक होने के कारण रद्द की गई थी।

इसके अलावा, बिहार में अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें सिपाही भर्ती और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी की परीक्षा प्रमुख हैं।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और प्रशासनिक विफलता

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में एक भी परीक्षा बिना पेपर लीक के नहीं हो पा रही है। वहीं, सत्ताधारी जेडीयू की प्रवक्ता अंजुम ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उनके माता-पिता के दौर में बीपीएससी का हाल इससे भी बदतर था।

पटना कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल नवल किशोर चौधरी के अनुसार, बिहार का प्रशासन अब कमजोर और भ्रष्ट हो चुका है। यह समस्या सिर्फ बीपीएससी तक सीमित नहीं है, बल्कि समूचे राज्य में भर्ती परीक्षाओं को प्रभावित कर रही है।

शिक्षा प्रणाली में गिरावट: क्या है समाधान?

शिक्षा मामलों के पत्रकार बसंत कुमार मिश्रा का कहना है कि बिहार में परीक्षा अब एक बड़ा उद्योग बन चुका है, जिसमें माफिया गैंग भी सक्रिय हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक संरक्षण के कारण यह माफिया सशक्त होते जा रहे हैं, और इसका खामियाजा छात्र और राज्य दोनों को भुगतना पड़ रहा है।

पटना विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष शिवजतन ठाकुर का कहना है कि 1980 के दशक के बाद से बिहार की शिक्षा व्यवस्था में गिरावट आई है। यही छात्र आजकल प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें चोरी और धोखाधड़ी की घटनाएं बढ़ी हैं।

आर्थिक अपराध इकाई की भूमिका और सरकारी प्रयास

बिहार में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले में कई अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। लेकिन, इससे जुड़े माफिया और भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं, और यह परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता को प्रभावित कर रहा है।

निष्कर्ष: भविष्य के चुनावों में 'फ्री एंड फेयर एग्ज़ाम' एक अहम मुद्दा बन सकता है

बिहार में पेपर लीक और परीक्षा में धांधली की लगातार घटनाओं को देखते हुए, यह कहना गलत नहीं होगा कि 2025 के विधानसभा चुनावों में 'फ्री एंड फेयर एग्ज़ाम' एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है।

इस बीच, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस समस्या के समाधान के लिए कठोर कदम उठाने की आवश्यकता महसूस हो रही है, ताकि राज्य में छात्रों और परीक्षार्थियों के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली बनाई जा सके।

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