मध्य प्रदेश: पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा का करोड़ों की संपत्ति बनाने का मामला
श्रेणी: अपराध और कानूनमध्य प्रदेश में पूर्व परिवहन विभाग के कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा और उनके सहयोगी चेतन सिंह गौर का मामला सुर्खियों में है। लोकायुक्त और आयकर विभाग की संयुक्त कार्रवाई में करोड़ों की संपत्ति जब्त होने के बाद इस प्रकरण ने सबका ध्यान खींचा है।
अब तक की कार्रवाई:
गाड़ी से बरामद नक़दी और सोना:
20 दिसंबर को भोपाल के पास एक लावारिस गाड़ी से 52 किलो सोना और 10 करोड़ रुपये नक़द मिले। गाड़ी चेतन सिंह गौर के नाम पर रजिस्टर्ड थी, लेकिन बताया गया कि इसका इस्तेमाल सौरभ शर्मा करते थे।संपत्तियों की बरामदगी:
सौरभ और चेतन के ठिकानों पर छापेमारी में 230 किलो चांदी, 17 करोड़ रुपये नक़द, और कई लग्ज़री कारें जब्त की गईं।शुरुआत और पदोन्नति:
सौरभ शर्मा को 2016 में ग्वालियर परिवहन विभाग में अनुकंपा के आधार पर आरक्षक के पद पर नियुक्त किया गया। कुछ ही वर्षों में उन्होंने परिवहन चेक पोस्टों के ठेके लेकर बड़ी संपत्ति अर्जित कर ली।
कैसे बनी संपत्ति?
ग्वालियर परिवहन विभाग में काम करने के दौरान सौरभ ने विभाग में मजबूत पकड़ बनाई। उनके पास प्रदेश के लगभग आधे परिवहन चेक पोस्टों के ठेके थे। 2023 में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली और रियल एस्टेट तथा हॉस्पिटैलिटी के व्यवसाय में कदम रखा।
दोस्ती और नेटवर्क:
सौरभ शर्मा और चेतन सिंह गौर चंबल अंचल के रहने वाले हैं और अच्छे दोस्त बताए जाते हैं। पूछताछ में चेतन ने कहा कि वह सौरभ के कर्मचारी के रूप में काम करता था।
जांच और आगे की कार्रवाई:
- लोकायुक्त ने अब तक 7.98 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति का खुलासा किया है।
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया है।
- आयकर विभाग और लोकायुक्त दोनों इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं।
सार्वजनिक प्रतिक्रिया:
यह मामला सरकारी कर्मचारियों के भ्रष्टाचार का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। आम जनता और प्रशासनिक अधिकारियों में इसे लेकर तीखी चर्चा हो रही है।
यह मामला केवल संपत्ति अर्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी पद का दुरुपयोग और सार्वजनिक संसाधनों की लूट का भी प्रमाण है। जांच के परिणाम सौरभ शर्मा और उनके नेटवर्क के कई अन्य पहलुओं को उजागर कर सकते हैं।
