'मेरे बेटे का सपना वकील बनना था...' परभणी में दलित युवक की हिरासत में मौत का मामला
महाराष्ट्र के परभणी जिले में पुलिस हिरासत में दलित युवक की मौत के मामले ने राज्य में हड़कंप मचा दिया है। यह घटना 18 दिसंबर को हुई, जब 22 वर्षीय सागर अशोक पवार को परभणी पुलिस ने चोरी के एक मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था।
परिवार का आरोप:
मृतक सागर के पिता अशोक पवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "मेरे बेटे का सपना वकील बनने का था। वह पढ़ाई में अच्छा था और हमें उस पर गर्व था। पुलिस ने उसे झूठे आरोप में फंसाया और उसकी बेरहमी से पिटाई की।"
अशोक पवार ने बताया कि उनका बेटा घर लौटने वाला था, लेकिन पुलिस ने उसे थाने बुलाया और फिर उसकी मौत की खबर आई।
पुलिस का पक्ष:
परभणी पुलिस ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि सागर को चोरी के एक मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पुलिस का दावा है कि हिरासत के दौरान सागर की तबीयत बिगड़ी और उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परभणी के एसपी चंद्रशेखर देशमुख ने कहा, "हम मामले की निष्पक्ष जांच करेंगे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का पता चलेगा।"
दलित संगठनों का आक्रोश:
इस घटना के बाद परभणी और आसपास के इलाकों में दलित संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
भीम आर्मी और अन्य संगठनों ने इसे जातिगत भेदभाव और पुलिस बर्बरता का मामला बताते हुए आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।
भीम आर्मी के नेता सूरज कांबले ने कहा, "यह मामला पुलिस की जातिवादी मानसिकता को दर्शाता है। सागर की मौत के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को तुरंत निलंबित कर गिरफ्तार किया जाए।"
सागर का जीवन और संघर्ष:
सागर पवार परभणी के एक छोटे से गांव का रहने वाला था। वह विधि की पढ़ाई कर रहा था और उसका सपना समाज में न्याय की स्थापना करना था। परिवार के मुताबिक, सागर अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठा रहा था और गरीबों की मदद करने के लिए वकील बनना चाहता था।
राजनीतिक हलचल:
इस घटना पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'लोकतंत्र पर धब्बा' बताया। उन्होंने कहा, "यह घटना दलितों के खिलाफ अत्याचार की बढ़ती घटनाओं का उदाहरण है। मैं सागर के परिवार के साथ खड़ा हूं। दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।"
बीजेपी और शिवसेना ने इसे राहुल गांधी का "राजनीतिक ड्रामा" बताया। शिवसेना नेता शायना एन.सी. ने कहा, "राहुल गांधी सिर्फ राजनीति करने के लिए यहां आए हैं। हमारे मुख्यमंत्री ने पहले ही जांच के आदेश दे दिए हैं।"
सरकार की कार्रवाई:
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच दल (SIT) के गठन की घोषणा की है। उन्होंने सागर के परिवार को ₹10 लाख की आर्थिक सहायता और एक सरकारी नौकरी देने का आश्वासन दिया है।
क्या कहते हैं मानवाधिकार संगठन?
मानवाधिकार संगठनों ने पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों पर सवाल उठाए हैं।
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने कहा, "यह घटना भारत में पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों की भयावह सच्चाई को उजागर करती है। दोषियों को सजा मिलनी चाहिए और सागर के परिवार को न्याय दिलाना चाहिए।"
न्याय की मांग
परभणी के सागर पवार की मौत ने न केवल उनके परिवार को, बल्कि पूरे दलित समाज को झकझोर दिया है। सागर के पिता अशोक पवार की एक ही मांग है, "हमें हमारे बेटे के लिए न्याय चाहिए। दोषियों को सख्त सजा दी जाए।"
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(रिपोर्ट: तौसबुल)
