पंजाब-हरियाणा बॉर्डर, खनौरी
पंजाब-हरियाणा की सरहद पर खनौरी में किसानों के आंदोलन को किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के आमरण अनशन ने नई ऊर्जा दी है। 19 दिसंबर को जब उनकी तबीयत बिगड़ी, तो आंदोलन स्थल पर भावनाओं का ज्वार देखने को मिला।
डल्लेवाल का ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक गिर गया, और वह बेहोशी की हालत में चले गए। इस खबर के बाद किसानों में हलचल मच गई। मौके पर गुरबाणी का जाप और डल्लेवाल के लिए अरदास की गई।
डल्लेवाल का संघर्ष और योगदान
जगजीत सिंह डल्लेवाल, भारतीय किसान यूनियन (सिद्धूपुर) के प्रदेश अध्यक्ष हैं और पिछले चालीस वर्षों से किसान आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। 70 वर्षीय डल्लेवाल कैंसर से पीड़ित हैं, लेकिन उनके जज्बे ने उन्हें आंदोलन का प्रमुख चेहरा बना दिया है।
डल्लेवाल का जन्म पंजाब के फरीदकोट जिले के डल्लेवाल गांव में हुआ। उन्होंने राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री हासिल की और छात्र जीवन से ही सिख स्टूडेंट फेडरेशन के जरिए संघर्षों से जुड़े रहे।
उनका योगदान किसानों के हितों के लिए संघर्ष में अमूल्य रहा है। दिल्ली के तीन कृषि कानून विरोधी आंदोलन के दौरान उनकी भूमिका ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख किसान नेता के रूप में स्थापित किया।
परिवार और आंदोलन की प्रेरणा
डल्लेवाल के बेटे गुरपिंदर सिंह का कहना है कि उनके पिता ने किसान आंदोलन के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। उन्होंने बताया कि उनकी मां का इस साल जनवरी में निधन हो गया, लेकिन इसके बावजूद उनके पिता का हौसला डिगा नहीं।
डल्लेवाल करीब 17 एकड़ जमीन के मालिक हैं और कई बार किसान संघर्ष के दौरान जेल जा चुके हैं।
आमरण अनशन का असर
खनौरी बॉर्डर पर किसानों का डर है कि सरकार डल्लेवाल को अस्पताल में भर्ती करवा सकती है, जैसा कि पहले 26 नवंबर को हुआ था। लेकिन किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर डल्लेवाल को जबरन उठाने नहीं देंगे।
डल्लेवाल का यह संघर्ष और उनका आमरण अनशन किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
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(रिपोर्ट: तौसबुल)
